वेब ब्राउजर इंटरनेट उपयोग करने का एक अत्यंत मूलभूत (fundamental) साधन या टूल है जिसका उपयोग करके हम इंटरनेट के उस हिस्से को access कर सकते हैं जिसे हम World Wide Web या केवल Web कहते हैं। तो क्या है इंटरनेट ब्राउजर, यह कैसे काम करता है और इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं चलिए जानते हैं।
Note- यह लेख एक इंटरनेट ब्राउजर के विषय में एक परिचयात्मक निबंध (Introductory Essay) के रूप में लिखा गया है, जिसमें इसके विषय में बेसिक बातें शामिल की गई हैं।
वही पढ़ें जो आप पढ़ना चाहते हैं..
1. वेब ब्राउजर क्या है उदाहरण सहित समझाइए (What is Web Browser)
वेब ब्राउज़र एक ऐसा सॉफ्टवेयर टूल होता है जो इंटरनेट उपयोग करने में हमारी सहायता करता है।
विकिपिडिया के अनुसार इंटरनेट ब्राउज़र की यह परिभाषा है-
A web browser is an application for accessing websites.
wikipedia
आसान शब्दों में समझें तो इंटरनेट पर वेबसाइटें होती हैं जिन्हें कोडिंग भाषाओं (HTML, CSS, JavaScript) की सहायता से बनाया जाता है। वेब ब्राउज़र इन भाषाओं को समझता है और उसके अनुसार हमें वेबसाइट को render करता है या कहें दिखाता है।
पढ़ें- एचटीएमएल क्या है अर्थ समझाइए | What is HTML in Hindi
वेब ब्राउज़र के उदाहरण ( Examples)
वेब ब्राउज़र के वेसे तो कई सारे उदाहरण उपलब्ध हैं हालांकि सबसे लोकप्रिय 5 इंटरनेट ब्राउज़र की list इस प्रकार है-
- गूगल क्रोम (Google Chrome)
- माइक्रोसॉफ्ट एज (Microsoft Edge) – New generation of Internet Explorer.
- एप्पल सफारी (Safari Browser)
- मोज़िला फायरफॉक्स (Mozila FireFox) – An Open Source Browser
- ओपेरा (Opera Browser)
- इंटरनेट इक्स्प्लोरर (Internet Explorer) – It was shut down in 2021 by MicroSoft.
- यूसी ब्राउज़र (UC Browser) – A Chinese Browser
- Samsung Internet – Web Browser by Samsung
2. वेब ब्राउज़र का इतिहास (History)
1950 तक कंप्युटर्स एक पूरा कमरे के बराबर की जगह घेरते थे और काम आज के एक पॉकेट कैलक्यूलेटर के समान करते थे। हालांकि अगले अगले 20 साल में ही काफी कुछ बदल गया और कंप्युटर्स को काफी जटिल (complex) चीजों को हैन्डल करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। यही वो दौर था जब अंतरिक्ष तक मानव की पहली यात्राएं हुई और इसमें एक बड़ा योगदान कंप्युटर्स का ही था।
खैर, 1969 में पहली बार दो दूरस्थ कंप्युटर्स को आपस में जोड़ा गया और जिसके साथ शुरुआत हुई इंटरनेट की। हालांकि इस दौर में इंटरनेट पूरी तरह प्राइवेट था और इसे केवल सरकारी संस्थाएं और रिसर्च ऑर्गनीज़ेशन्स ही उपयोग कर सकती थी।
1990 आते-आते इंटरनेट का स्वरूप बदलने लगा। CERN में ब्रिटिश वैज्ञानिक Tim-Berners Lee और उनकी रिसर्च टीम ने इंटरनेट के ऐसे स्वरूप का निर्माण किया जो public था और जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति use कर सकता था। इंटरनेट के इस रूप को उन्होंने नाम दिया – वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) अर्थात पूरे दुनिया में फैला हुआ इंटरनेट।
वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) को एक्सेस करने के लिए टिम ने एक खास सॉफ्टवेयर बनाया था जिसे उन्होंने Web Browser नाम दिया था। उन्होंने जो वेब ब्राउजर बनाया था उसका नाम भी “WorldWideWeb” ही था। इस तरह का दुनिया का सबसे पहला ब्राउजर 1990 में टिम बरनर्स ली द्वारा बनाया गया था।
ब्राउज़र युद्ध (The Browser War)
वर्ल्ड वाइड वेब के रिलीज होते ही यह पूरी दुनिया में छा गया और हजारों organisations और universities ने इसमें एक बड़ा अवसर देखा।
1993 में National Center for Supercomputing Applications (NCSA), University of Illinois के कंप्युटर वैज्ञानिक Marc Andreessen ने एक ब्राउज़र लॉन्च किया जिसे उन्होंने Mosaic नाम दिया और यह काफी सफल भी रहा। इसके बाद तो जैसे ब्राउज़र्स का विश्व युद्ध शुरू हो गया।

इसके अगले ही वर्ष 1994 में मोसेक को बनाने वाले एंडर्सन ने एक अन्य ब्राउज़र Netscape Navigator लॉन्च किया जो उस वक्त का सबसे कामयाब ब्राउज़र रहा। और लाखों लोगों के लिए यह पहला ब्राउज़र था जिससे उन्होंने इंटरनेट को पहली बार access किया था।
इसके अगले ही साल माइक्रोसॉफ्ट अपने ब्राउज़र Internet Explorer के साथ ब्राउज़र वार में शामिल हुआ। इसी दौरान Netscape ने अपने ब्राउज़र में Javascript रिलीज की जो आज वेब की standard programming language है।
इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने ब्राउज़र में CSS Support सबसे पहले release किया जो आज वेब पेजेस को स्टाइल करने की standard language है।
इस दौर की एक रोचक घटना तब घटी जब 1997 में माइक्रोसॉफ्ट ने Internet Explorer 4.0 रिलीज किया और उसके एक बड़े से Logo को ट्रक में लादकर वे Netscape के ऑफिस के बाहर रखकर आ गए। खैर, इसके अगले दिन नेटस्केप के लोग भी अपने बड़े से डियानासौर के लोगो के साथ माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस पहुच गए और उसको उसके lawn में छोड़कर आ गए।
इस दौर में ब्राउज़र वॉर अपने चरम पर था।
हालांकि अगले 4 सालों में चीजें बदलीं। माइक्रोसॉफ्ट अपने Operating Systems के साथ Internet Explorer को पहले से ही installed देने लगा और 2000 तक आते-आते उसका मार्केट शेयर 99% पहुच गया।
नेटस्केप ने इस युद्ध से बाहर निकलने का निर्णय किया और 2002 में अपना कोडबेस open-source कर दिया और Mozila नामक Non-Profit की शुरुआत करके Mozila FireFox रिलीज किया।
ओपेरा तो पहले ही 1995 में लॉन्च हो चुका था और चुपके-चुपके ब्राउज़र वॉर देख रहा था।
इसके अगले ही साल 2003 में एप्पल ने भी अपना Safari ब्राउज़र लॉन्च किया।
2008 में गूगल ने अपना Chrome लॉन्च किया, जो आज 65% मार्केट शेयर रखता है।
माइक्रोसॉफ्ट 2015 में लॉन्च हुआ, और 2021 में Internet Explorer को बंद कर दिया गया।
ब्राउज़र की हिस्ट्री के बारे में अधिक जानें – The History of Web Browsers by Mozila
3. वेब ब्राउज़र कैसे काम करता है? (How does Browser work)
इंटरनेट ब्राउज़र की कार्यविधि (working functionality) काफी सरल है।
ब्राउज़र funamentally, वेबसाइट्स के कोड को समझता है और उसके बाद हमें वेबसाइट को दिखाता है जैसे की हमें वो दिखनी चाहिए।
जब हम किसी भी वेबसाइट में जाते हैं तो उसमें इस तरह का कोड लिखा होता है..

ब्राउज़र के पास सर्वर से यह कोड़ आता है जिसे वह इस हमें कुछ इस तरह से दिखा देता है..

उपर्युक्त कार्यविधि से समझ गए होंगे की ब्राउज़र का वास्तविक काम होता क्या है, हालांकि यह इतना सरल नहीं है, जितना हमने बताया है।
ब्राउज़र हमें वेबसाइट दिखाने के लिए विस्तृत (detailed) प्रक्रिया का उपयोग करता है जो कि कुछ इस प्रकार है-
यूआरएल प्रोसेसिंग (Processing the URL):
जब आप एक वेब पता (URL) टाइप करते हैं या सर्च करते हैं, तो ब्राउज़र DNS (Domain Name System) का उपयोग करके उस अड्रेस को एक IP address में बदलता है ताकि वह वेब सर्वर को पहचान (identify) सके जिसमें आपकी वेबसाइट का डाटा स्टोर है।
पढ़ें – यूआरएल क्या है समझाइए | What is URL in Hindi (Computer Notes)
सर्वर से डेटा प्राप्त करना (Requesting Data from the Server):
ब्राउज़र वेब सर्वर से HTTP या HTTPS के माध्यम से डेटा के request करता है। अगर यह रीक्वेस्ट सफल हो जाती है तो ब्राउज़र के पास Website के कोड के साथ उसका Media files भी आ जाती हैं।
डेटा रेन्डरिंग और प्रोसेसिंग (Rendering and Processing Data):
सर्वर से आया डेटा प्राप्त होने के बाद ब्राउज़र डेटा को प्रोसेस करता है और वेब पेज को डिस्प्ले करने के लिए डेटा को render करता है। यह HTML, CSS और Javascript के माध्यम से वेब पेज ड्रॉ करता है।
पेज डिस्प्ले (Page Display):
एक बार पेज ड्रॉ हो जाता है तो ब्राउज़र उसे यूजर को दिखाता है और अगर user उस पेज के साथ कोई interaction यानि click आदि करता है तो वह वेबपेज कोई उस interaction या event के अनुसार DOM को अपडेट करता है, और अगर उसे उस event को पूरा करने के लिए और ज्यादा resources की जरूरत पद रही है तो वह उसके लिए भी server को दोबारा request भेज सकता है।
कैशिंग (Caching):
अगर आप पहली बार किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो उसे लोड होने में काफी समय लगता है लेकिन अगर आप दूसरी बार उस वेबसाइट पर जाते हैं तो वह जल्दी लोड हो जाती है.. लेकिन कैसे? यह सब caching से होता है। आधुनिक वेब ब्राउज़र्स वेबसाइट की कुछ फाइल्स हमारे local device में सेव कर लेते हैं जिससे वेबसाइट जल्दी लोड होती है।
कुल मिलाकर कहें तो ब्राउज़र URL को सर्वर के IP Address में बदलता है, सर्वर से डेटा फेच करता है, उस डेटा से पेज ड्रॉ करता है और फिर उस पेज पर होने वाले events के प्रति पेज को adjust करता है।
नोट- हर ब्राउज़र अलग-अलग इंजन का इस्तेमाल करते हैं जैसे- क्रोम V8 इंजन का, Firefox Gecko इंजन का, जिस कारण उसके द्वारा पेज डिस्प्ले पर थोड़ी-बहुत अलग इमेज बन सकती है। एप्पल का सफारी ब्राउजर काफी अलग तरह से webpage ड्रॉ करता है।
4. वेब ब्राउज़र के कार्य (Functions of Web Browser)
वेब ब्राउज़र के बहुत सारे कार्य होते हैं और ये इतने आवश्यक हैं की इनकी अनुपस्थिति में इंटरनेट इक्स्प्लोर करना असंभव मालूम पड़ता है।
- URL प्रसंस्करण: जब आप URL टाइप करते हैं या सर्च बॉक्स में डालते हैं, तो ब्राउज़र उस URL को प्रोसेस करता है और उसका IP अड्रेस निकालने के लिए DNS सिस्टम का उपयोग करता है।
- सर्वर कनेक्शन: ब्राउज़र उस IP address पर कनेक्ट करता है जो URL से मिला है। इसके लिए वह HTTP या HTTPS प्रोटोकॉल का उपयोग करता है।
- अनुरोध भेजना: ब्राउज़र सर्वर को वेब पेज के resources के लिए request भेजता है, जैसे कि HTML files, styles, images, scripts, etc
- डेटा प्राप्त करना: अगर रीक्वेस्ट सफल हो जाती है तो सर्वर डेटा भेजता है जिसे ब्राउजर recieve करता है।
- डेटा प्रोसेसिंग और रेंडरिंग: ब्राउज़र डेटा को प्रोसेस करता है उसे समझता है और उसके हिसाब से वेबपेज ड्रॉ करके यूजर को दिखाता है।
- पेज डिस्प्ले: ब्राउज़र डेटा, स्टाइल्स, और स्क्रिप्ट्स को मिलाकर पूरे वेब पेज को display करता है, जिसे हम देखते हैं।
- इंटरैक्टिविटी और Usability कार्य: वेबपेज लोड हो जाने के बाद यदि यूजर उसपे click आदि करता है तो ब्राउज़र उसे handle करता है और उसके हिसाब से पेज में चेंज करता है।
- लोकल कैशिंग: मॉडर्न वेब ब्राउज़र्स वेबसाइट को जल्दी-से लोड करने के लिए Caching का उपयोग करते हैं।
5. वेब ब्राउज़र से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द (Web Browser Tech Terms)
ब्राउज़र इंजन (Browser Engine)
हमने जाना है की वेब ब्राउज़र वेबसाइट के कोड यानि HTML, CSS और जावास्क्रिप्ट को डिकोड करके उसको यूजर को दिखाते हैं। यह काम ब्राउज़र में Browser Engine करता है। जैसे हम CPU को कंप्युटर का दिमाग कहते हैं उसे तरह Browser Engine भी ब्राउज़र का दिमाग होता है।
यह कुछ पोपुलर ब्राउज़र्स के ब्राउज़र इंजन कुछ इस प्रकार है।
Google Chrome – v8
Internet Explorer- Chakra
Edge- EdgeHTML
Apple Safari – WebKit
Firefox – Gecko
क्रोमियम ब्राउज़र (Chromium Browser)
क्रोमीअम एक open source browser प्रोजेक्ट है जिसे गूगल द्वारा बनाया गया है और आज इसके कोड पर ही Google Chrome और Edge जैसे ब्राउज़र काम करते हैं।
ब्राउज़र का उपयोग क्यों किया जाता है?
ब्राउज़र का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है, निम्नलिखित कुछ मुख्य कारण होते हैं:
- वेब पेज्स को देखने के लिए: ब्राउज़र का मुख्य उपयोग वेब पेज्स (web pages) को देखने के लिए होता है। जब आप एक वेब पता (URL) टाइप करते हैं या सर्च बॉक्स में डालते हैं, तो ब्राउज़र वेब पेज को डिस्प्ले करता है, जिसमें आपको टेक्स्ट, छवियाँ, वीडियो, ऑडियो आदि दिखाई देते हैं।
- ऑनलाइन सर्च: ब्राउज़र का उपयोग आपके सर्च क्वेरी के आधार पर इंटरनेट पर सूचना खोजने के लिए किया जाता है। जब आप कुछ सर्च करते हैं, ब्राउज़र आपको संबंधित वेब पेज्स की सूची प्रदान करता है जिनमें आपकी खोजी हुई जानकारी होती है।
- ईमेल चेक करने के लिए: बहुत से लोग ब्राउज़र का उपयोग अपने ईमेल खातों की जांच करने, ईमेल संदेशों को पढ़ने और लिखने के लिए करते हैं।
- सोशल मीडिया: ब्राउज़र का उपयोग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों (जैसे कि फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम) पर अपने दोस्तों और परिवार सदस्यों के साथ जुड़ने, उनके स्थिति को देखने और सामग्री साझा करने के लिए किया जाता है।
- ई-कॉमर्स: ब्राउज़र का उपयोग ऑनलाइन खरीददारी करने के लिए भी किया जाता है, जहाँ आप विभिन्न ऑनलाइन दुकानों में उत्पादों की खोज करके खरीद सकते हैं।
- शिक्षा और अध्ययन: ब्राउज़र का उपयोग विभिन्न शिक्षा संस्थानों और वेबसाइटों पर शिक्षा सामग्री पढ़ने, अध्ययन करने और शैक्षिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए किया जाता है।
कूकीज़ क्या होती हैं? (What is Browser Cookies)
ब्राउज़र कुकीज (Cookies) एक प्रकार की छोटी सी पाठ्यक्षमता (text file) होती है जो आपके डिवाइस (कंप्यूटर, स्मार्टफ़ोन, टैबलेट आदि) और वेबसाइटों के बीच जानकारी को स्थानांतरित करती है। कुकीज़ का मुख्य उद्देश्य वेबसाइट्स को आपके उपयोग और पसंदों की समझने में मदद करना होता है, ताकि वे आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें।
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आशा है इंटरनेट ब्राउज़र के विषय में यह निबंध उपयोगी रहा होगा।
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