इंटरनेट पर हर वक्त हम websites उपयोग करते हैं। वेबसाइट के नाम के साथ अक्सर .Com या .in लगा होता है। सबसे सरल शब्दों में समझा जाए तो यही डोमेन नेम (Domain Name) होता है।
हालांकि इसके बहुत सारे अन्य पहलू हैं जिन्हें हम आगे जानते हैं. (20 म)
वही पढ़ें जो आप पढ़ना चाहते हैं..
1) डोमेन नाम क्या होता है? (What is Domain Name)
डोमेन नेम इंटरनेट पर एक वेबसाइट की यूनीक पहचान (Unique Identity) होती है, जिसकी सहायता से कोई भी व्यक्ति उस वेबसाइट तक पहुँच सकता है।
डोमेन नाम को विकिपीडिया इस तरह से परिभाषित करता है-
In the Internet, a domain name is a string that identifies a realm of administrative autonomy, authority or control. Domain names are often used to identify services provided through the Internet, such as websites, email services and more.
https://en.wikipedia.org/wiki/Domain_name
डोमेन नेम के उदाहरण (Examples of Domain Name)-
उदाहरण के लिए, जब हम गूगल पर जाते हैं तो google.com का इस्तेमाल करते हैं यही डोमेन नेम है। हालांकि https://www.google.com एक डोमेन नेम नहीं है बल्कि एक URL है।
डोमेन नेम और यूआरएल में फरक (Domain Name vs URL)
यूआरएल इंटरनेट पर मौजूद किसी webpage पर पहुँचने का एक Unique Address होता है। जो कई सारे हिस्सों से मिलकर बनता है।
इनमें से ही एक हिस्सा domain name का होता है।
मसलन, https://google.com/search में https:// एक स्कीम या प्रोटोकॉल है; google.com डोमेन नेम या होस्ट नेम है और /search अतिरिक्त पाथ है।
कंप्युटर नेटवर्किंग और इंटरनेट में इसका बहुत ज्यादा महत्व है। यह इंटरनेट पर unique names को मैनेज करने के लिए बहुत जरूरी है।
अधिक जानें- इंटरनेट पर URL क्या होता है? (What is URL)
2) डोमेन नाम का इतिहास (History of Domain Naming)
1985 से पहले किसी वेबसाइट तक पहुँचने के लिए उसके IP Address का उपयोग किया जाता था। जैसे की अगर मुझे google.com तक जाना है तो मुझे 12.12.123.23 टाइप करना होता।
इसी तरह facebook.com के लिए कुछ और होता। हर वेबसाइट का Host Address हमें पता होना चाहिए था उस website तक पहुँचने के लिए।
इस समस्या के समाधान के लिए साल 1985 में Internet Engineering Task Force (IITF) द्वारा डोमेन नाम प्रणाली (Domain Name System) का निर्माण किया गया। उस समय केवल दो Domain Extensions उपलब्ध थे – .com and .edu
इसके बाद 15 March 1985 को पहला डोमेन नाम Symbolics.com रजिस्टर हुआ, जो आज भी working है।
पहले पाँच डॉट_कॉम डोमेन नेम
symbolics.com
bbn.com
think.com
mcc.com
dec.com
पहले पाँच .edu डोमेन नेम
berkeley.edu
cmu.edu
purdue.edu
rice.edu
ucla.edu
आज डोमेन नेम को Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN) कंट्रोल करती है और यही संस्था Domain Name Registrars (eg-Godaddy, Hostinger) को licence प्रदान करती है।
3) डोमेन नेम के प्रकार (Types of Domain Name)
डोमेन नेम 5 प्रकार के हो सकते हैं-
यह एक डोमेन नेम है जिसके आधार पर हम डोमेन के भागों को समझने का प्रयास करेंगे – www.yourwebsite.com.
1. टॉप लेवल डोमेन (Top Level Domain/TLDs)-
टॉप-लेवल डोमेन नेम डोमेन का आखिरी हिस्सा होता है। उदाहरण के लिए, ऊपर दिए गए उदाहरण में .com एक TLD है।
टॉप लेवल डोमेन के आखिर में लगता है और यह किसी Country या Territory को represent नहीं करता हो, तभी इसे TLD माना जाएगा।
उदाहरण- www.sochokuchnaya.com में .com एक TLD है | ठीक इसी प्रकार .org, www.wikipedia.org का Top Level Domain Extension है।
टॉप लेवल डोमेन को अक्सर डोमेन extension भी कहा जाता है क्योंकि यह वेबसाइट का टाइप दर्शाता है।
1988 तक ये 7 TLDs जारी किए जा चुके थे।
कुछ पोपुलर टॉप-लेवल डोमेन (List)-
.com: Commercial businesses .org: organizations, typically nonprofits .gov: Government agencies .edu: Educational institutions .net: Network technology organizations .mil: Military organizations .int: Intergovernmental organizations | ||||||
- Generic Top Level Domain Name (gTLDs)
आजकल बहुत सारे नए gTLDs प्रचचलन में हैं जिनकी संख्या करीब 1300 है, कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं-
.co
.app
.shop
.xyz
.bank
.earth
.cloud
.club
.health
.ai
.ml
टॉप लेवल डोमेन को अन्य categories में बांटा जा सकता है-
A. स्पॉन्सर्ड टॉप लेवल(Sponsored TLDs)
ये डोमेन किसी खास कम्यूनिटी के लिए reserved हैं जो geographically, professionally, ethnic, organisation बेस्ड हो सकती हैं।
जैसे-
.asia
.tel
.jobs
.mil
.gov
.xxx
.post
.aero
.jobs
B. ब्रांड टॉप लेवल (Brand TLDs)
ये किसी ब्रांड या कंपनी के प्राइवेट डोमेन इक्स्टेन्शन होते हैं.
उदाहरण के लिए, blog.google में .google ब्रांड Top Level डोमेन है।
C. रिजर्व्ड टॉप लेवल (Reserved Top Level)
इन्हें कोई नहीं खरीद सकता। इन्हें कोई भी publicly use कर सकता है। इसका उद्देश्य testing आदि के लिए होता है।
.example
.test
.localhost – https://localhost:3000
.invalid
2. कन्ट्री-कोड टॉप-लेवल डोमेन (ccTLDs)
ये डोमेन इक्स्टेन्शन्स भी डोमेन के आखिर में लगते हैं और वेबसाइट किस country की है यह दर्शाते हैं।
उदाहरण के लिए, भारत की वेबसाइटें .in, पाकिस्तान की .pk, अमेरिका की .us, ब्रिटेन की .uk, चीन की .cn और नेपाल की .np डोमेन इक्स्टेन्शन का इस्तेमाल करती हैं।
आज 308 देशों के ccTLDs मौजूद हैं जिनके आप यहाँ जाके देख सकते हैं..
3. द्वितीय स्तरीय डोमेन (Second-Level Domains (SLDs))
TLDs आखिर में लगते हैं SLDs उनसे ठीक पहले लगते हैं।
उदाहरण के लिए, www.sochokuchnaya.com में sochokuchnaya ही सेकंड लेवल डोमेन नेम है।
आपकी वेबसाइट का नाम ही SLD होता है।
4. तृतीय स्तरीय डोमेन या सब डोमेन (Third Level Domain / SubDomain)
सबडोमेन या Third लेवल डोमेन वह हिस्सा होता है जो आपके SLD से ठीक पहले लगता है।
www.godaddy.com में www ही सबडोमेन है। हालांकि अब www लगाना आवश्यक नहीं है।
इसके अलावा dev.sochokuchnaya.com में dev सबडोमैन है और यह पूरी तरह से एक अलग वेबसाइट के रूप में कार्य करता है।
4) डोमेन नेम कैसे काम करता है? (How does Domain name work)
डोमेन नेम के काम करने के पूरे सिस्टम को Domain Name System कहते हैं। इसका काम डोमेन नेम को सर्वर के आईपी से कनेक्ट करना होता है।
DNS के काम करने का तरीका काफी सरल है जो इस प्रकार है-
- जब हम ब्राउजर में domain name टाइप करते हैं तो यह request, जिसे query कहते हैं, DNS Server के पास जाती है।
- DNS सर्वर अब पता करता है कि यह डोमेन किस IP Address से संबंधित है।
- आईपी पता करने के बाद DNS उस सर्वर से कनेक्ट करता है जहां पर वेबसाइट का डेटा रखा हुआ है।
- सर्वर आपकी रीक्वेस्ट प्रोसेस करता है और valid पाए जाने पर आपको वापस डेटा भेज देता है।
- इसके बाद आपके पास वेबसाइट का code आता है जिसे आपका browser आपको decode करके दिखाता है।
इसके साथ ही DNS ईमेल को भी सही जगह पहुंचाने में मदद करता है। एक email address डोमेन नेम से जुड़ा होता है (eg. abc@gmail.com में gmail.com डोमेन नाम है) और इसी डोमेन नाम से email को सही IP से लाया या फिर भेजा जाता है।
ज्यादा जानें-
वेब ब्राउजर क्या और कैसे काम करता है?
आईपी अड्रेस क्या होता है? (IP Address Meaning in Hindi)
5) डोमेन नेम कैसे बनाएँ? (How to create Domain)
डोमेन नेम बनाने यानि उसे रजिस्टर करना और खरीदना आजकल काफी आसान है-
- डोमेन नेम रेजिस्टर करने से पहले आपको पता करना है कि आप अपनी वेबसाइट के लिए कौन-सा नाम रखना चाहते हैं और कौन-से extension के साथ। (जैसे- इस वेबसाईट का नाम schokuchnaya.com है इसी तरह आपको अपने लिए पता कर लेना है)
- हो सकता है वह नाम पहले से ही किसी ने खरीद लिया हो, यह पता करने के लिए आपको किसी Domain Registrar (जैसे- Godaddy, Hostinger) की वेबसाइट पर चले जाना है.
- वहाँ जाकर आपको अपना डोमेन नाम सर्च करना है और देखना है वह उपलब्द है या नहीं। अगर उपलब्ध है तो good and well, वरना कोई दूसरा नाम ढूंढ लीजिए।
- एक बार आपको अपनी पसंद का नाम मिल जाए तो इसे खरीद लें। कोई ऑफर या डिस्काउंट चल रहा हो तो उसे भी देख लें। Paypal Honey Chrome Extension आपकी इसमें मदद कर सकता है।
- एक बार आप अपना डोमेन खरीद लें, फिर आप उसे अपनी website के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। बल्ले-बल्ले!!
सुनें- अच्छा डोमेन नेम कैसे ढूढ़े? 7 टिप्स!
6) डोमेन रजिस्ट्रार क्या है? (What is Domain Registrar)
पूरी दुनिया में Domain Names को नियंत्रित करने का अधिकार ICANN के पास है। हालांकि उसने कई Domain Name Vendors को डोमेन नेम register करने का license जारी किया हुआ है, जिन्हें Domain Registrar कहते हैं। हमें इन्ही से Domain Name खरीदने होते हैं।
- गोडैडी
- होस्टिंगर डोमेन
- नेमचीप
- गूगल डोमेन
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